पीड़ाओं की प्रतिध्वनियां ( मेरी डायरी )

"अब मुझे तुम भूल जाना ....."

कितनी आसानी से कह दिया था तुमने व्हाट्सएप्प पर एक सन्देश भेजकर । 

क्या वाकई यह इतना आसान होगा ? तुम मेरी छोड़ो अपनी सोचो .... क्या उसके गले में अपनी बाहों का हार पहनाते हुए अपना पहला आलिंगन तुम्हें याद नहीं आएगा ? 
स्मरण है तुम्हें .. गाड़ी का गियर बदलते वक़्त तुम्हारे हाथ की अँजुरियां जो मेरी अँजुरियों में फंसी हुईं थीं, मुझे तरंगायित कर रही थी..सदैव साथ रहने का विश्वास प्रगाढ़ कर रहीं थीं... कभी वो हाथ मेरे बालों को सहलाने चला जाता तो तुम दायें हाथ से गियर बदलती... क्या ये मासूम लम्हें तुम्हारे चित्त में नहीं चुभेंगे ? 

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तुम्हें जाना है न... जाओ ! 

लेकिन क्या तुमसे रसवंती चुम्बनों की झड़ी विस्मृत हो पाएगी ? 

तुम जब उसकी गोद में सोने की इच्छा जतलाओगी तो क्या तुम्हारी गोद में सुलाने का आग्रह करती मेरी बच्चों सी जिद्द तुम्हारा रास्ता नहीं रोकेगी ? 

तुम उसकी किसी बात पर ठहाका कैसे लगाओगी ? इस प्रश्न पर मैं ठीक से सोच नहीं पाया। बेबात हंसना, मुस्कुराना.... चिढ़ाना एक दूसरे को, कैसे एक फॉर्मेट में ढल पायेगा ? तुम भी सोचना ज़रा....अपना प्यार बहाव था और जो अब तुम करने जा रही हो वह नियोजना है ! 

क्या उसे पता है कि तुम्हें क्या नहीं पसंद है...यह इसलिए कह रहा हूँ कि प्रेमी अक्सर प्रेमिकाओं की पसंद याद रखते हैं।

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मेरा चेहरा अपनी गौरवर्णा हथेलियों के बीच लेकर कहना " यह मेरा चाँद तो यहाँ है " और चूम लेना .... मैं फिर रेशमी ज़ुल्फ़ें हटा देता था जो हमारा मौन सुनने को आतुर हुई चेहरे पर आ जातीं थीं तुम्हारे .... तब हम दोनों प्रेम में होते थे और शेष जगत प्रलय में ! 

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वो तुम्हें कभी जब कहेगा कि श्रृंखला नहीं शृंखला लिखो तो सच बताना मैं तुम्हें याद नहीं आऊंगा क्या ? 
तुम्हें कभी कोई स्वर सुनायी देगा भीड़ के बीच कि कैसे कैसे लोग नौकरी लग जाते हैं...तो क्या मेरा परिहास तुम्हें बेचैन नहीं करेगा ? 

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एक यक्ष प्रश्न का उत्तर दो.... तुम उसे घुमाने ले जाओगी या वो तुम्हें ? 

तुम्हें नींद अच्छी लगती है और जागने पर चाय... यह बात वो बिना बताये समझ जाएगा क्या ? 

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तुम अभी तक बच्चों सी हो..यह बात उसे नहीं समझ आएगी..क्योंकि वो तुम्हें बदन से देखेगा और बदन से तुम परिपक्व हो, बड़ी हो... भीतर तक वो जाएगा तो वहाँ एक बच्चा मिलेगा, लेकिन वो जाएगा इसका मुझे सन्देह है. 

तुम्हें मैं याद आऊंगा या नहीं... लेकिन अपनी यादें हरदम तुम्हारे साथ रहेंगी....

अब इतना ही काफ़ी है.... शेष समझ लेना. क्योंकि तुम समझदार हो ! 

शुभकामनाएं !! 

◆ प्रवीण मकवाणा 

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