एक लज्जित नागरिक की तरफ़ से ......
लज्जित नागरिक की तरफ़ से ..... यदि पालघर में हुई साधुओं की हत्या के लिए महाराष्ट्र सरकार एवं पुलिस प्रशासन जिम्मेदार है तो मनीषा के रात्रि शवदाह के लिए उत्तरप्रदेश सरकार एवं पुलिस प्रशासन जिम्मेदार क्यों नहीं ?? पुलिस क्या करती है; आपके साथ कोई वाक़या नहीं हुआ तो आप नहीं समझ पाएंगे। मैंने अपनी बहन का शव अस्पताल के चंगुल के मुक्त कराने के लिए प्रशासन के आगे हाथजोडी की है, मैं यह दर्द अच्छे से समझ सकता हूँ। अचरज है कि कुछ लोग अलग-अलग एंगल निकाल लाये हैं। हद्द है कि कुछ को दलित-स्वर्ण, किसी को कंगना-मनीषा तो किसी को अर्णब-रवीश का कोण नज़र आ रहा है। अपनी खुद की बहन बेटी के साथ अगर ऐसा हो जाये तब भी यही दलाली करोगे क्या ? वक़्त मिल जाये तो कलेजे पर हाथ रखकर विचारना .... बेटी सिर्फ़ बेटी होती है। नाना विमर्श कोरी राजनीति है, पार्टी प्रोपोगेंडा है। आपकी राजनीतिक निष्ठा समझ में आती है, लेकिन उसके लिए अपनी बहन बेटियों की इज्ज़त दांव पर मत लगाइए ! कंगना को बेवज़ह घसीटने वाले भी एक बेटी की ताक़त को कोसते ही हैं... वे परोक्ष रूप से ड्रग्स माफियाओं के पक्ष में जा खड़े होते हैं। ...