Posts

Showing posts from October, 2020

नवरात्र पर वामी-विलाप महज़ छलावा

सनातन का कोई पर्व हो और वामपंथी छाती न कूटें -- यह कैसे सम्भव है ??  शक्ति की आराधना का पुनीत पर्व नवरात्र प्रारम्भ हो चुका है। इस दौरान समस्त सनातनी अलग-अलग तरह से पूजा-अर्चना करते हैं। जैसी श्रद्धा वैसा अनुष्ठान !  वामियों का संकुचन देखिए -  एक कम्युनिस्ट लिख रहा है " हम नौ दिन ढोंग में रहेंगे... लड़कियां ताड़ने के भिन्न-भिन्न तरीके ढूंढेंगे" ...  कम्युनिस्ट जैसा होता है, वैसा ही प्रस्तुत होता है। यह उसकी आत्म का विस्तार-वाक्य है। क्या सभी ढोंग करते हैं ? कुछ लोग करते हैं...हां, यह मैं भी मानता हूं। क्या वे लोग लड़कियां नहीं ताड़ते जो पूजा-अर्चना नहीं करते ?  फिर लड़कियां ताड़ने की मानवीय विकृति का माताजी की पूजा-अर्चना के क्या ताल्लुक़ ?? यह वामियों का कुतर्क है। हम पाखण्ड का साधारणीकरण करने वाले आत्महंता हिन्दू हैं।  क्या किसी वामपंथी ने इस्लाम की बकरा काटने की पाशविक-प्रवृत्ति के प्रतिकार का साहस जुटाया ? नहीं। जबकि वह स्थूल है। जो दीखता है; उसका विरोध कम्युनिस्ट नहीं करता। वह आदर्शलोक की स्थापना का हवाई प्रयास करता है।  एक कवि लिखते हैं -- जिसने माँ की ...

गांधी जी के प्रति .....

गांधी को समझने एवं स्वीकारने में बड़ी बाधा है - अस्मितावाद और दर्शन का द्वैत ! अस्मितावादियों को गांधी के दर्शन से सदैव ख़तरा बना रहता है। वे सोचते हैं गांधी को अपनाने से समाज निर्बल बनता है। यही समस्या अम्बेडकर की गांधी से असहमति के मूल में है। वस्तुतः गांधी समाज को मजबूत बनाते हैं।  हिंदुओं का एक बड़ा तबक़ा इसी अस्मितावाद के चक्कर में गांधी को गरियाता घूमता है। उनकी स्थूल दृष्टि गांधीवाद के सूक्ष्म मूल्यों को पकड़ पाने में प्रायः निष्फल हुई है। गांधी के सद्गुण यदि तत्कालीन विकृति थे, तब भी उनका चरित कलुष क्योंकर हुआ ? क्योंकि उक्त विकृति समाज सापेक्ष थी, व्यष्टि सापेक्ष नहीं।  सत्य और अहिंसा का सर्वप्रथम प्रवर्तन गांधी ने नहीं किया, यह भारत के वैदिक मूल्य हैं। सत्य एवं अहिंसा गांधी का नहीं अपितु भारतीय लोक का सनातन अनुशीलन है। यह बात स्वयं गांधी कहते हैं। यदि वो इस पथ के राही हैं तो वह तो सच्चे मायनों में सनातनी हुए।   मैं गांधी का अस्वीकार भी उन्हीं की असहमति को आदर देने की परंपरा-परिधि में रखने का पक्षपाती हूँ। गांधी राष्ट्रीय नेता थे या नहीं, यह मैं नहीं जानता; लेकिन...