स्मृति-लेख
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फूफाजी आ. शिवलाल जी देवड़ा की चिर-विच्छित्ति : एक युग का अवसान

मैंने इस वर्ष शृंखलाबद्ध रूप से अपने आत्मस्थ प्रियजन खोये हैं। मित्र विकास से शुरू हुई वियुक्ति-यात्रा अनुजा ललिता से होते हुए दो दिन पहले मोहन जी, चाचा ( पापा के ममेरे भाई ) तक आ पहुंची ... और आज मेरे अतीव आत्मीय फूफाजी का देहावसान 😢😢 यह असह्य पीड़ा जो अनन्य अनुराग के व्याज उपजी है। अपने उपास्य कवि भवभूति के शब्दों में कहूं तो -- संतापकारिणो बन्धुजनविप्रयोगा भवन्ति....( अपने लोगों का  बिछुडना दु:खदायक होता है ) 

फूफाजी स्वयमेव सरकार थे। उनके इंगितों पर आज तक गाँव चलता आया था। उनकी बात की काट किसी के पास नहीं होती। वो जो कहते, कानून होता,, वो जहाँ जाते नये प्रतिमान गढ़ते। उनका सर कहीं झुका तो देव-मन्दिर की चौखट पर .... ऐसा स्वाभिमानी आदमी मैंने अपने जीवन में नहीं देखा।

एक पंक्ति में उनकी समष्टिगत स्थिति कहना चाहूं तो यही कहूंगा -- वो बैठकों का उल्लास थे। उन्हें सब एक कान होकर सुनते। वो बाँह चढ़ाकर जब बातों का रंग जमाते तो हर कोई सुनता रह जाता। उनका उक्ति-वैचित्र्य अनुपम था। उनका शब्द-शब्द वज़नी होता, जो बोलते धाक के साथ बोलते।

उनका लिबास साफ़ सफ़ेद रहता। वो बेतरतीब नहीं रहते। उनके चेहरे पर एक मुस्कान-रेखा सदैव रहती। ऐंठयोड़ी मूंछें कम्माल थी उनकी। वो मूंछों पर बारहा बट देते रहते। कानों में गोखरू और माथे पर पंचरंगी साफा, क्या शोभा उनकी?  मैंने उन्हें कभी निराश नहीं देखा। उनकी आभा से महफ़िलें खिल उठतीं।

मुझे फ़ोन पर अक़्सर कहा करते - " कोरे पण्डित ! हुशियारी घणी चढ़ी है,, म्हूं थारे हरका सात विङी खमीस रै गूजा मांय राखूं ... ( क्यों रे पण्डित ! ज्यादा होशियार हो गया है क्या ? तेरे जैसे सात विङी 7×20 अर्थात् 140 लोगों को अपने कमीज़ की जेब में रखता हूँ )

मुझे अचरज होता जब वो मुझे पण्डित कहते। मैंने एक दफ़ा कारण पूछा तो बोले -- " अरे थूं जणा बोले म्हनै ठा ईज नीं पड़े,, बोमणों जेहड़ी भाषा बोले " ( अरे ! जब तू बोलता है मुझे कुछ समझ नहीं आता, तू ब्राह्मणों जैसी भाषा बोलता है )

शिवलाल वाक़ई शिव थे, सुंदर थे और सत्य भी।

उनके संबंध में कई उद्धरण हैं, कभी विस्तार से लिखूंगा। आज तो बस मन अधिकार में नहीं रहा, सो लिख दिया। भगवान उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे ... हार्दिक श्रद्धांजलि 💐💐💐

शोकाकुल
प्रवीण

                         

कलियुगाब्द ५१२२ 
वैशाख शुक्ल नवमीं, विक्रम संवत् २०७७
शनिवार, ०२ मई सन् २०२०

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