वो लड़की मेरी आँखों में आती है
एक सुनहरा सपना बनकर
उसके होठों पर तैरतीं हैं
कई मुस्कान-लहरें ।
वो हंसती है
जैसे कई फूल शाख से टूटकर
किसी उजली चादर पर गिर जाएं.
वो चलती है हिरनी सी
गाती है कोयल सी
चमकती है सितारों सी
बजती है सितार सी
और बतियाती है अधिकार से
मेरी माँ की तरह, बड़ी बहन की तरह
वो मुझे सम्भालती है
एक छोटे बच्चे की तरह !
उसकी बातों में चुम्बक है
वो मुझे अपनी ओर खींचती है.
उसकी बातों में
खारे पानी के लवण हैं
जितना पीऊं, प्यास उतनी ही बढ़ती जाए.
उसकी भीगीं लटों में
टँग रहे हैं ख़्वाब कई सारे.
लता जैसी उसकी कोमल बाहें
वो समेट ले जिसे अपने भीतर
उसे अपनी खुश्बू से अधमरा कर दे.
मैं उसके चैट पर आने का इंतज़ार करता हूँ
जैसे छोटा बच्चा स्कूल में छुट्टी की घण्टी बजने का इंतज़ार करता है.
जैसे गृहिणी सुबह दूधवाले का इंतज़ार करती है.
उसका तिल, मेरा दिल
उसके गाल, मेरे सुर-ताल !!
तुम्हारा स्वागत प्रिय
यह वीरान दिल का भवन आपकी प्रतीक्षा में जाने कब से है.
एक सुनहरा सपना बनकर
उसके होठों पर तैरतीं हैं
कई मुस्कान-लहरें ।
वो हंसती है
जैसे कई फूल शाख से टूटकर
किसी उजली चादर पर गिर जाएं.
वो चलती है हिरनी सी
गाती है कोयल सी
चमकती है सितारों सी
बजती है सितार सी
और बतियाती है अधिकार से
मेरी माँ की तरह, बड़ी बहन की तरह
वो मुझे सम्भालती है
एक छोटे बच्चे की तरह !
उसकी बातों में चुम्बक है
वो मुझे अपनी ओर खींचती है.
उसकी बातों में
खारे पानी के लवण हैं
जितना पीऊं, प्यास उतनी ही बढ़ती जाए.
उसकी भीगीं लटों में
टँग रहे हैं ख़्वाब कई सारे.
लता जैसी उसकी कोमल बाहें
वो समेट ले जिसे अपने भीतर
उसे अपनी खुश्बू से अधमरा कर दे.
मैं उसके चैट पर आने का इंतज़ार करता हूँ
जैसे छोटा बच्चा स्कूल में छुट्टी की घण्टी बजने का इंतज़ार करता है.
जैसे गृहिणी सुबह दूधवाले का इंतज़ार करती है.
उसका तिल, मेरा दिल
उसके गाल, मेरे सुर-ताल !!
तुम्हारा स्वागत प्रिय
यह वीरान दिल का भवन आपकी प्रतीक्षा में जाने कब से है.
◆ प्रवीण मकवाणा
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